फ़िदक की कहानी आ़एशा की ज़बानी
पढ़ने का समय: 2 मिनटफ़िदक की कहानी आ़एशा की ज़बानी रसूल (स.अ़.) की रेहलत के बअ़्द जो वाक़आ़त रूनुमा हुए उन में से अहम वाक़आ़ मुक़द्दमए फ़िदक था। बल्कि येह वाक़आ़ हेदायत ह़ासिल करने वालों के लिए एक मश्अ़ले […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटफ़िदक की कहानी आ़एशा की ज़बानी रसूल (स.अ़.) की रेहलत के बअ़्द जो वाक़आ़त रूनुमा हुए उन में से अहम वाक़आ़ मुक़द्दमए फ़िदक था। बल्कि येह वाक़आ़ हेदायत ह़ासिल करने वालों के लिए एक मश्अ़ले […]
पढ़ने का समय: 5 मिनटअह्ले तसन्नुन के बअ़्ज़ ख़ुतबा इस बात को फ़ख़्रिया बयान करते हैं कि उनके इमाम अबू ह़नीफ़ा नोअ़्मान बिन अबी शबरमा इमाम जअ़्फ़र सादिक़ के शागिर्द रहे हैं। इस बाबत अबू ह़नीफ़ा से येह जुमला […]
पढ़ने का समय: 10 मिनटइब्तेदाइया: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिरर्हीम ’’उद्ओ़ इला सबीले रब्बे-क बिलह़िक्मते वल मौए़ज़तिल ह-स-न-त व जादिलहुम बिल्लती हिया अह़सन’’ लोगों को अपने रब के रास्ते की तरफ़ हिकमत और उमदा नसीहत के साथ दावत दो और उनसे बेहतरीन अंदाज़ […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटइन्ना अव्व-ल बैतिन वोज़ेअ़़ लिन्नासे लल्लज़ी बेबक्क-त मुबा-रकन व हुदन लिल आ़़-लमी-न बिला शुब्हा वोह पहला मकान जो लोगों के लिए बनाया गया वह बक्का (मक्का) में है जो बाबरकत है और सारे आ़लम के […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटमुबाहिले के नुक्ते नज़र से सहाबा पर अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की अफ़ज़लियत सहाबा और अज़्वाज के हामीयों को मुस्तक़िल इस हक़ीक़त से नबर्द-आज़मा होना है कि उनके क़ाएदीन इस्लाम की तारीख़ के किसी भी अहिम वाक़ए […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटहारून रशीद बनी अब्बास का एक बादशाह गुज़रा है। बनी अब्बास क्योंकि रसूल अल्लाह स.अ. के चचा अब्बास की औलाद हैं इसलिए वह भी बनी हाशिम हैं। मगर हुकूमत पर क़ाबिज़ होने के बाद इस […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटअल्लाह का हाथ कौन है? कुछ मुसलमान शियों पर अमीरुल-मोमेनीन अलैहिस्सलाम और अइम्मा अलैहिमुस्सलाम की हैसियत को बढ़ा चढ़ा कर पेश करने का इल्ज़ाम आइद करते हैं। उनका दावा है कि शियों ने अइम्मा अलैहिमुस्सलाम […]
पढ़ने का समय: 5 मिनट(1) अली सय्यदुल मुस्लेमीन (2) अली इमामुल मुत्तक़ीन (3) अली क़ाएदुल ग़ुर्रिल-मोहज्जेलीन (4) अली यासूबुल मोमेनीन (5) अली वलीयुल मुत्तक़ीन (6) अली यासूबुद्-दीन (7) अली अमीरूल मोमेनीन ”अमीर कुल्ले मोमिन“ (8) अली सय्यदे वुल्दे आदम […]
पढ़ने का समय: 5 मिनटअहले तसन्नुन, हज़रत अली को ख़ुलफ़ा-ए-राशेदीन की तर्तीब के हिसाब से चौथे मक़ाम पर रखते हैं जबकि शियों का मानना अलग है। शियों का अक़ीदा है कि हज़रत अली नबी नहीं हैं मगर नबीए करीम […]
पढ़ने का समय: 2 मिनट२८ सफ़र सन 11 हिज्री, येह वो तारीख़ है जिस रोज़ रसूले ख़ुदा स.अ. इस दारे फ़ानी से रुख़स्त हुए। उनकी रेहलत के चालीस साल बाद इसी तारीख़ को ऑनहज़रत के बड़े नवासे हज़रत हसने […]
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