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J. Khadija

उम्मुल मोअ्‌मेनीन जनाबे ख़दीजा (स.अ़.) – मोअ्‌मिनों की ह़क़ीक़ी माँ

पढ़ने का समय: 3 मिनटक़ुरआन करीम ने अज़्वाजे नबी (स.अ़.व.आ.) को मोअ्‌मेनीन की माँ होने का रुत्बा और दर्जा दिया है। ह़क़ीक़ी मअ़्‌नों में इस लक़ब की सबसे ज़्यादा मुस्तह़क़ रसूलुल्लाह (स.अ़.व.आ.) की पहली ज़ौजा जनाबे ख़दीजतुल कुबरा (स.अ़.) […]

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J. Khadija

उम्मुल मोअ्‌मेनीन ख़दीजा (स.अ़.) से आ़एशा का ह़सद

पढ़ने का समय: 4 मिनटह़ज़रत ख़दीजा (स.अ़.), रसूले ख़ुदा (स.अ़.व.आ.) की पहली ज़ौजा होने के साथ साथ इस्लाम क़बूल करने वाली पहली ख़ातून भी हैं। आँह़ज़रत (स.अ़.व.आ.) की निगाह में वोह एक अ़ज़ीमुश्शान मक़ाम और बलन्द मर्तबा रखने वाली […]

अहलेबैत (अ.स.)

इस्लाम पर दौलते जनाबे ख़दीजा (स.अ.) का एहसान

पढ़ने का समय: 2 मिनटकिसी भी मिशन की कामयाबी के लिए जितना ख़ुलूसे नियत की ज़रूरत होती है उस से कहीं ज़्यादा सरमाया (माल) दरकार होता है। हर आलमी (दुन्यवी) रहबर और सरबराहे कौम को साहिबे सरवत मुख़्लिस मददगारों […]

अहलेबैत (अ.स.)

उम्मुलमोमेनीन जनाबे खदीजा (स.अ.) मोमिनो की हक़ीक़ी माँ

पढ़ने का समय: 3 मिनटक़ुरआने करीम ने अज़वाजे नबी (स.अ.व.व.) को मोमेनीन की माँ होने का रूतबा और दर्जा दिया है। हक़ीक़ी मानो में इस लक़्ब की सब से ज़्यादा मुस्तहिक़ रसूलुल्लाह (स.अ.व.व.) की पहली ज़ौजा जनाबे ख़दीजातुल कुबरा […]

अहलेबैत (अ.स.)

उम्मुलमोमेनीन जनाबे खदीजा (स.अ.)

पढ़ने का समय: 3 मिनट“व व जदका आयेलन फ़अग़ना” “हम ने आपको मोहताज पाया तो आप को ग़नी कर दिया।” जनाबे ख़दीजा बिन्त ख़ोवैलिद न सिर्फ़ ये के रसूले ख़ुदा (स.अ.व.व.) की अज़ीज़तरीन ज़ौजा हैं बल्कि सबसे पहले इसलाम […]

अहलेबैत (अ.स.)

उम्मुल मोमेनीन ख़दीजा (स.अ.) से आय़शा का हसद

पढ़ने का समय: 4 मिनटहज़रते ख़दीजा रसूले ख़ुदा (स.अ.) की पहली बीवी होने के साथ साथ इसलाम क़ुबूल करनेवाली पहली खा़तून भी हैं। आँ-हज़रत (स.अ.) कि निगाह में वह एक अज़ीमुश-शान मुक़ाम और बुलन्द मर्तबा रखने वाली खा़तून हैं। […]

अहलेबैत (अ.स.)

उम्मुल मोमेनीन जनाबे खदीजा (स.अ.) मोमीनों की हक़ीक़ी माँ

पढ़ने का समय: 3 मिनटक़ुरआने करीम ने अज़वाजे नबी को मोमेनीन की माँ होने का रुतबा और दर्जा दिया है। ह़क़ीक़ी मानो में इस लक़ब की सब से ज़्यादा मुसतहक़ रसूलुल्लाह (स.अ.) की पहली बीबी जनाबे ख़दीजतुल कुबरा (स.अ.) […]

अहलेबैत (अ.स.)

जनाबे ख़दीजा (स.अ.) जिन्हें अल्लाह और जिब्रईल सलाम भेजते हैं।

पढ़ने का समय: 2 मिनटइसलाम की तालीमात में एक अहम रुक्न एक दूसरे को सलाम करना है। अहादीसे नबवी (स.अ.) में ‘इफशाउस सलाम’ की बदुत ज़्यादा ताकीद की गई है। क़ुरआने करीम में भी सलाम करने पर बहुत ज़ोर […]