क्या क़ुरआन, फ़ासिक़-ओ-फ़ाजिर मुसलमान पर लअ़्नत करने से रोकता है?
पढ़ने का समय: 4 मिनटएक वीडियो क्लिप में एक वह़ाबी ख़तीब अपने मुरीदों को बता रहे थे कि यज़ीद पर लअ़्नत करना जाएज़ नहीं है। उनका कहना था कि भले ही यज़ीद फ़ासिक़-ओ-फ़ाजिर था मगर वोह कम अज़ कम […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटएक वीडियो क्लिप में एक वह़ाबी ख़तीब अपने मुरीदों को बता रहे थे कि यज़ीद पर लअ़्नत करना जाएज़ नहीं है। उनका कहना था कि भले ही यज़ीद फ़ासिक़-ओ-फ़ाजिर था मगर वोह कम अज़ कम […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटक्या मअ़्सूमीन (अ़.स.) ने कभी भी लअ़्नत करने की तरग़ीब नहीं दी? जब अह्लेबैत (अ़.स.) को अ़ज़ीयत देने वालों पर लअ़्नत भेजने की बात आती है तो कुछ अफ़राद इस पर एअ़्तेराज़ करते हैं। वोह […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटदुश्मने अ़ली (अ़.स.) से बराअत ज़रूरी है इस्लाम में और ख़ुसूसन शीआ़ मकतबे फ़िक्र में, दुश्मनाने ख़ुदा और रसूल से बराअत करने को वाजिब क़रार दिया गया है। इस बाबत क़ुरआन में मुतअ़द्दिद आयात मौजूद […]
पढ़ने का समय: 5 मिनटक्या तबर्रा करना एक बेफ़ाएदा अ़मल है? कहा जाता है: मुख़ालेफ़ीन से इस तरह़ की बह़्सों पर इतनी तवानाई ख़र्च की गई कि इस का कोई नतीजा नहीं निकला क्योंकि अह्लेबैत (अ़.स.) के दुश्मन अपने […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटदीने इस्लाम के बुनियादी उसूलों में तवल्ला और तबर्रा दोनों शामिल हैं। बल्कि दुश्मनाने अहलेबैत अ.स. से तबर्रा किए बग़ैर किसी की विलायते अहलेबैत अ.स. क़ाबिले क़बूल नहीं है। बराअत अज़ दुश्मनाने ख़ुदा भी इसी […]
पढ़ने का समय: 5 मिनट19 रमज़ानुल मुबारक सन 40 हिजरी को सुबह की नमाज़ के वक्त एक ऐसा दिल दोज़ (दिल हिलाने वाला) वाक़िया ज़ाहिर हुआ जिसे मुसलमानों की तारीख़ आज तक नहीं भुला पाई। मस्जिदे कुफ़ा के मेहराबे […]
पढ़ने का समय: 5 मिनटइन्नल्लज़ीन यूजू़नल्लाहा व रसूलुहू लानल्लाहो फ़िद्दुनिया वल आख़िरते व अअद्द लहुम आज़ाबम् मुहीना (सूरए एहज़ाब, आयत 57) जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को अज़ियत देते हैं अल्लाह उनपर दुनिया और आखे़रत में लानत करता […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटमाहे रमज़ान को साल के दूसरे महीनों पर जो फज़ीलत हासिल है उनमें से एक यह भी है कि इस महीने में क़ुरान नाज़िल हुआ। जिस शब क़ुरान नाज़िल हुआ है उसे शबे क़द्र कहा […]
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