क्यों शीओ़ं को कुछ साल पहले तक दुख़्तरे रसूल (स.अ़.व.आ.) की शहादत के सिलसिले में कोई ख़बर नहीं थी?

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क्यों शीओ़ं को कुछ साल पहले तक दुख़्तरे रसूल (स.अ़.व.आ.) की ख़लीफ़ा के हाथों शहादत के सिलसिले में कोई ख़बर नहीं थी और अब इस वाक़ेआ़ की तरफ़ मुतवज्जेह हो गए और अ़ज़ादारी बरपा करने लगे?
(१) दौरे ह़ाज़िर में ईरान के बअ़्‌ज़ शहरों में ख़त्मे बुख़ारी की तक़रीब मुन्अ़क़िद होने लगी है जबकि पहले उनके यहाँ इस क़िस्म की कोई तक़रीब मुन्अ़क़िद नहीं होती थी। फिर क्यों अब इन लोगों को इस क़िस्म की तक़रीबात मुन्अ़क़िद करना याद आने लगा?
(२) जेमाअ़्‌, वेदाअ़्‌ और जेहादे निकाह़ का रेवाज सलफ़ियों के यहाँ पहले नहीं था लेकिन अब हो गया है। क्यों अब उनको इन अह़काम को बजा लाने की याद आई?
(३) इस्लामी मुमालिक की तख़रीब कारी और उन पर सख़्ती और अपने आप को मुसलमान कहने वालों के हाथों मुसलमानों का क़त्ले आ़म, यहूदियों का देफ़ाअ़्‌ और उनको पनाह और अमान देना पहले नहीं था लेकिन दौरे ह़ाज़िर में बअ़्‌ज़ नाम नेहाद इस्लामी मुमालिक और अपने आप को मुसलमान कहने वालों के तवस्सुत से सारे अअ़्‌माल वुजूद में आ गए हैं।
(४) अगर शीओ़ं की तारीख़ी और रिवाई किताबों की तरफ़ मुराजेआ़ किया जाए तो इस बात का मुशाहेदा किया जा सकता है कि शीई़यान व मवालियाने अह्लेबैत (अ़.स.) तारीख़ के किसी भी दौर और ज़माने में वाक़ेआ़ए सक़ीफ़ा, ह़ज़रत अ़ली (अ़.स.) के तस्लीम शुदा ह़क़ के ग़स्ब होने, फ़ातेमा ज़हरा (स.अ़.) के घर पर वह़शीयाना हुजूम और आतंकवादी ह़मला, उनके दरवाज़े को आग लगाने और दुख़्तरे नबी (स.अ़.व.आ.) पर तमाचे को भूले नहीं हैं। हाँ, अगर तारीख़ के किसी दौर में अ़ज़ादारी और मजालिस के बरपा करने में कोई कमी हुई तो सिर्फ़ इसलिए कि उमवी और मरवानी ह़ुक्काम और बादशाहों ने इस की मुख़ालेफ़त की और पाबन्दियाँ लगाई जबकि येह अपने आप को इस्लाम और अह्लेबैत (अ़.स.) का वफ़ादार और चाहने वाला कहते थे।

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