एहतेमामे ग़दीर-पार्ट-१
पढ़ने का समय: 6 मिनटएहतेमामे ग़दीर -पार्ट-१ किसी शै (चीज़) की ख़ुसूसीयत या अहमियत क्या सिर्फ़ माद्दीयत ही पर मुनहसिर हो सकती है? किसी वाक़ए का तारीख़़ी होना क्या यह उस की कम अहमियत की दलील हो सकती है? […]
पढ़ने का समय: 6 मिनटएहतेमामे ग़दीर -पार्ट-१ किसी शै (चीज़) की ख़ुसूसीयत या अहमियत क्या सिर्फ़ माद्दीयत ही पर मुनहसिर हो सकती है? किसी वाक़ए का तारीख़़ी होना क्या यह उस की कम अहमियत की दलील हो सकती है? […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटनहजुल बलाग़ाह की हैरत अंगेज़ खु़सूसियात और इमतियाज़ात में से एक इमेतियाज़ मुख्तलिफ़ और मुतानव्वए पहलुओं के ऐतेबार से अजीबो ग़रीब गहराई व गीराई पर मुश्तमिल होना है। हर पढ़ने वाला पहली फ़ुर्सत में इसे […]
पढ़ने का समय: 6 मिनटज़मानए क़दीम से ग़दीर कलाम और इस्लामी मोतिका़दात में तारीख़ के अज़ीमतरीन मुबाहिस में से है और यह मसअलऐ इमामतो खि़लाफ़त के हस्सास तरीन मसाइल में से एक है। मुसलमानों के गिरोहों के दरमियान इख़तेलाफ […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटहज़रत फातेमातुज़ ज़हरा (स.अ.) जो कि जन्नत की औरतों की सरदार हैं, बज़ाहिर दुन्यवी चीज़ों में ज़रा सी भी दिलचस्पी नहीं रखती थीं। इस्लामी दुनिया ने बारहा यह माना है कि वह नफ्स़ पर क़ाबू […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटकिसी भी मिशन की कामयाबी के लिए जितना ख़ुलूसे नियत की ज़रूरत होती है उस से कहीं ज़्यादा सरमाया (माल) दरकार होता है। हर आलमी (दुन्यवी) रहबर और सरबराहे कौम को साहिबे सरवत मुख़्लिस मददगारों […]
पढ़ने का समय: 7 मिनटनहजुल बलाग़ा के बहुत से खुतबों और मुख़तसर कलेमात में मौत की सख्तियाँ और क़ब्र की तारीकी और मौत के बाद क़यामत की मुश्किलात को ब्यान किया गया है और निजी तौर पर इस तरह […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटबागे़ फिदक के गसब होने का वाक़िया तारीखे़ इस्लाम में एक बहुत बडी हैसियत रखता है। इस वाकिए में रसूल (स.अ.) की बेटी और रसूल (स.अ.) का ख़लीफा़ होने का दावा करने वाले हाकिम का […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटशेख़ नजदी मुख्त़लिफ़ तरीकों से पैग़म्बरे अकरम (स.अ.) की तनक़ीद किया करता था और उस का यह ख़्याल था कि तौहीद को महफूज़ रखने का यही एक तरीक़ा है। उसकी चन्द गुस्ताखियाँ दर्ज ज़ैल हैं। […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटअल्लाह ने इन्सानों की हिदायत के लिये लगातार अंबिया और मुरसलीन भेजे ताकि वो बनी आदम को इंसानियत का दरस दें और उनका किरदार इस बुलंदी पर ले जायें के फरिशते उनकी ख़िदमत करने पर […]
पढ़ने का समय: 3 मिनट“व यकूलुल लज़ीन कफ़रू लस्त मुर्सला कु़ल कफ़ा बिल्लाहे शहीदुम बैनी व बैनकुम व मन इन्दहू इल्मुल किताब” (सूरए राद, आयत 43) काफ़िर कहते है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम) रसूल नहीं […]
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