इमाम बाकि़र (अ.स.) का एक मुख्त़सर मुनाज़ेरा
पढ़ने का समय: 3 मिनटशियों पर जो ऐतेराज़ात होते रहते हैं उन में से एक ऐतेराज़ मुताअ( आरज़ी निकाह) के सिलसिले में किया जाता है। उनके मुखा़लेफीन का ये इल्ज़ाम है कि शियों ने मज़हब में एक नई चीज़ […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटशियों पर जो ऐतेराज़ात होते रहते हैं उन में से एक ऐतेराज़ मुताअ( आरज़ी निकाह) के सिलसिले में किया जाता है। उनके मुखा़लेफीन का ये इल्ज़ाम है कि शियों ने मज़हब में एक नई चीज़ […]
पढ़ने का समय: 3 मिनट21 रमज़ान सन 40 हिजरी को अमीरूलमोमेनीन अली इब्ने अबि तालिब (अ.स.) की शहादत वाक़ेय हुई। इसके बाद तमाम उम्मेते मुसलेमा ने मुत्तहिद होकर सिब्ते अकबर, फरज़न्दे अलीये मुर्तुज़ा हज़रत इमाम हसने मुजतबा (अ.स.) की […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटजब अवाम ने बग़ावत करके तीसरे ख़लीफा़ उस्मान बिन अफ़फा़न को क़त्ल कर दिया तो खि़लाफ़त की गददी यकबारगी खाली हो गई। लोग हुजूम दर हुजूम मौलाए कायनात अली इब्ने अबि तालिब (अ.स.) के पास […]
पढ़ने का समय: 5 मिनटइमाम रज़ा (अ.स.) की शहादत के बाद शियों की इमामत की ज़िम्मेदारी उनके फ़रज़न्दे अरजुमन्द हज़रत मोहम्मद तक़ी अल-जवाद (अ.स.) के सिपुर्द हुई। उस वक़्त आपकी कमसिनी का दौर था मगर आप (अ.स.) के कमालात […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटजब अवाम ने बग़ावत करके तीसरे ख़लीफा़ उस्मान बिन अफ़फा़न को क़त्ल कर दिया तो खि़लाफ़त की गददी यकबारगी खाली हो गई। लोग हुजूम दर हुजूम मौलाए कायनात अली इब्ने अबि तालिब (अ.स.) के पास […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटइमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) की विलादते बा सआदत एक रजबुल मुरज्जब 57 हिजरी में मदीनए मुनव्वरा में हुई। आप खानदाने इसमतो तहारत की वह पहले कड़ी हैं जिनका सिलसिलाए नसब माँ और बाप दोनों की […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटशिया होने की अहम तरीन निशानीयों में से एक निशानी यह भी है कि शिया अहलेबैते पैग़म्बर (अलैहिमुस्सलाम) की ख़ुशी मे ख़ुश और उनके ग़म में ग़मज़दा होता है। यह बात उसूले दीन के मुसल्लेमात […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटमुसलमानों की तारीख़ में जब कभी भी बेवफ़ाई और अहद शिक्नी की मिसाल देनी होती है तो लोग सिर्फ़ अहले कूफा़ की मिसाल देते हैं। इसका सबब कर्बला का सन 61 हिजरी का वो वाक़ेआ […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटइमाम रज़ा (अ.स.) ने फ़रमायाः अए फ़रज़न्दे शबीब! अगर तुम्हें किसी चीज़ पर रोना आए तो फ़रज़न्दे रसूल हुसैन इब्ने अली (अ.स.) पर गिरया करो। इमाम अली बिन मुसा रज़ा (अ.स.) का एक लक़्ब ‘ग़रीबूल […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटअहले इस्लाम में जितना अहले तशय्यों के यहाँ बुर्ज़ुगाने दीन की ज़ियारत का रेवाज है , उतना किसी दुसरे मसलक में नही पाया जाता। अहले तश्य्यो के यहाँ अईम्मा और मासूमीन के मज़ारात न सिर्फ […]
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