सक़लैन क्या है?
पढ़ने का समय: 2 मिनटहज़रत रसूले काएनात सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम का इरशादे गिरामी है “मैं तुम्हारे दरमियान दो गिराँ क़द्र चीजें छोड़कर जा रहा हूं। अल्लाह की किताब और मेरी इतरत जो कि मेरे अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटहज़रत रसूले काएनात सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम का इरशादे गिरामी है “मैं तुम्हारे दरमियान दो गिराँ क़द्र चीजें छोड़कर जा रहा हूं। अल्लाह की किताब और मेरी इतरत जो कि मेरे अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) […]
पढ़ने का समय: 6 मिनटसूरए माएदा आयत नं. 67 का यह हिस्सा निहायत ग़ौर तलब और क़ाबिले फ़िक्र है, इसलिए कि रसूले अकरम (स.अ.) अपनी 23 साला तबलीग़ी ज़िन्दगी में रिसालते इलाहिया के पहूँचाने में सख्त़ तरीन औका़त और […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटहज़रते ख़दीजा रसूले ख़ुदा (स.अ.) की पहली बीवी होने के साथ साथ इसलाम क़ुबूल करनेवाली पहली खा़तून भी हैं। आँ-हज़रत (स.अ.) कि निगाह में वह एक अज़ीमुश-शान मुक़ाम और बुलन्द मर्तबा रखने वाली खा़तून हैं। […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटक़ुरआने करीम ने अज़वाजे नबी को मोमेनीन की माँ होने का रुतबा और दर्जा दिया है। ह़क़ीक़ी मानो में इस लक़ब की सब से ज़्यादा मुसतहक़ रसूलुल्लाह (स.अ.) की पहली बीबी जनाबे ख़दीजतुल कुबरा (स.अ.) […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटसन दस हिजरी के इख्तेताम से ही सरवरे काएनात हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) अपनी उम्मत को यह बताते रहे कि अन्क़रीब मैं तुम्हारे दरमियान से चला जाने वाला हूँ। मैं अपने रब की दावत को […]
पढ़ने का समय: 5 मिनटइमाम रज़ा (अ.स.) की शहादत के बाद शियों की इमामत की ज़िम्मेदारी उनके फ़रज़न्दे अरजुमन्द हज़रत मोहम्मद तक़ी अल-जवाद (अ.स.) के सिपुर्द हुई। उस वक़्त आपकी कमसिनी का दौर था मगर आप (अ.स.) के कमालात […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटजब अवाम ने बग़ावत करके तीसरे ख़लीफा़ उस्मान बिन अफ़फा़न को क़त्ल कर दिया तो खि़लाफ़त की गददी यकबारगी खाली हो गई। लोग हुजूम दर हुजूम मौलाए कायनात अली इब्ने अबि तालिब (अ.स.) के पास […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटमुसलमानों की तारीख़ में जब कभी भी बेवफ़ाई और अहद शिक्नी की मिसाल देनी होती है तो लोग सिर्फ़ अहले कूफा़ की मिसाल देते हैं। इसका सबब कर्बला का सन 61 हिजरी का वो वाक़ेआ […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटबहुत से मुसलमान यह समझते हैं कि आँ-हज़रत की मौत एक बीमारी की वजह से हुई थी,जबकि हक़ीक़त इसके बर-अकस है इस ग़लत – फहमी के आम होने की वजह शायद मुसलमान ज़ाकेरीन; उलेमा और […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटरसूले-खु़दा (स.अ.) की रोज़े वफात यानी दोशम्बाह को सुबह में बाज़ असहाब आप की ख़िदमत में जमा हुए तो आँ-हज़रत (स.अ.) ने उन से फरमाया: ‘क़लम और काग़ज़ ले आओ ताकि ऐसा नविश्ता लिख दूँ […]
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