२८ सफ़र नाना और नवासे की शहादत एक जैसी है
पढ़ने का समय: 2 मिनट२८ सफ़र सन 11 हिज्री, येह वो तारीख़ है जिस रोज़ रसूले ख़ुदा स.अ. इस दारे फ़ानी से रुख़स्त हुए। उनकी रेहलत के चालीस साल बाद इसी तारीख़ को ऑनहज़रत के बड़े नवासे हज़रत हसने […]
पढ़ने का समय: 2 मिनट२८ सफ़र सन 11 हिज्री, येह वो तारीख़ है जिस रोज़ रसूले ख़ुदा स.अ. इस दारे फ़ानी से रुख़स्त हुए। उनकी रेहलत के चालीस साल बाद इसी तारीख़ को ऑनहज़रत के बड़े नवासे हज़रत हसने […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटकअ़बतुल्लाह और अली इब्ने अबी तालिब अलैहिमस्सलाम اِنَّ اَوَّلَ بَيْتٍ وُّضِــعَ لِلنَّاسِ لَلَّذِيْ بِبَكَّۃَ مُبٰرَكًا وَّھُدًى لِّـلْعٰلَمِيْنَ इन्ना अव्वला बैतिवं वुज़ेआ लिन-नासे लल्लज़ी बि-बक्-क-त मुबारकवं व हुदल-लिल आलमीन (सूरए आले इमरान आयत 96) यक़ीनन सबसे […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटहज़रत फातेमातुज़ ज़हरा (स.अ.) जो कि जन्नत की औरतों की सरदार हैं, बज़ाहिर दुन्यवी चीज़ों में ज़रा सी भी दिलचस्पी नहीं रखती थीं। इस्लामी दुनिया ने बारहा यह माना है कि वह नफ्स़ पर क़ाबू […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटकिसी भी मिशन की कामयाबी के लिए जितना ख़ुलूसे नियत की ज़रूरत होती है उस से कहीं ज़्यादा सरमाया (माल) दरकार होता है। हर आलमी (दुन्यवी) रहबर और सरबराहे कौम को साहिबे सरवत मुख़्लिस मददगारों […]
पढ़ने का समय: 2 मिनटबागे़ फिदक के गसब होने का वाक़िया तारीखे़ इस्लाम में एक बहुत बडी हैसियत रखता है। इस वाकिए में रसूल (स.अ.) की बेटी और रसूल (स.अ.) का ख़लीफा़ होने का दावा करने वाले हाकिम का […]
पढ़ने का समय: 3 मिनट“व यकूलुल लज़ीन कफ़रू लस्त मुर्सला कु़ल कफ़ा बिल्लाहे शहीदुम बैनी व बैनकुम व मन इन्दहू इल्मुल किताब” (सूरए राद, आयत 43) काफ़िर कहते है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम) रसूल नहीं […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटएक मर्तबा हारून रशीद ने अपने एक मुशीर जाफ़र बिन यह्या बरमक्की से कहा कि मैं चाहता हूँ कि छुपकर मुतकल्लेमीन (कलाम करनेवाले) की बात सुनूँ ताकि वह खुलकर अपने दलाएल पेश करें और जैसे […]
पढ़ने का समय: 4 मिनटसन 10 हिजरी के इख्तिताम से ही सरवरे कायनात हज़रत मोहम्मद मुस्तुफा़ (स.अ.) अपनी उम्मत को यह बताते रहे कि अनक़रीब मैं तुम्हारे दरमियान से चला जाने वाला हूँ। मैं अपने रब की दावत को […]
पढ़ने का समय: 3 मिनटबाज़ आह्ले तसन्नुन लोग इस बात पर ऐतेराज़ करते हैं कि शिया यह दावा करते हैं कि उनके बारहवें इमाम 255 हिजरी से यानी 1000 साल से ज़्यादा मुद्दत से ज़िन्दा हैं और ग़ैबत में […]
पढ़ने का समय: 3 मिनट“व आते ज़ल क़ुर्बा हक़्क़हू वल मिस्लीनव् वबनस्सबीले वला तुबज़्ज़िर तबज़ीरा” (सूरए इस्रा, आयत 26) आपने क़राबतदारों को उनका हक़ दीजिए और मिस्क़ीन और मुसालफ़िर को भी और इसराफ़ न किजीए। यह बात मुसल्लम है […]
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